सहारनपुर : लखनौती गांव इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है.गांव में स्थित मुगलकालीन किला लंबे समय से अवैध कब्जों की चपेट में था. बजरंग दल के पूर्व संयोजक विकास त्यागी ने बताया कि इस किले से जुड़ा एक मामला 18 अगस्त को जिला न्यायालय, सहारनपुर में आया था.कोर्ट ने अवैध कब्जेदारों को बेदखली का आदेश दिया था, लेकिन 18 से 24 अगस्त तक स्थानीय प्रशासन ने कोई कार्रवाई नहीं की.
उन्होंने बताया कि जब 24 अगस्त को इस मामले की सूचना मुख्यमंत्री कार्यालय, कमिश्नर साहब और डीएम सहारनपुर को दी गई, तब जाकर प्रशासन हरकत में आया.उसी दिन प्रशासन ने किले पर जाकर कोर्ट का आदेश कब्जाधारियों को रिसीव करवाया और 24 घंटे का समय दिया.कब्जाधारियों ने लिखित में दिया कि वे 24 घंटे बाद किला खाली कर देंगे.
इसके बाद 26 अगस्त को एसडीएम नकुड़ और पुलिस प्रशासन मौके पर पहुंचे और किले को अपने कब्जे में ले लिया.कब्जाधारियों ने लिखित में स्वीकार किया कि वे किला खाली कर रहे हैं.इस प्रकार यह ऐतिहासिक संपत्ति पुनः राज्य सरकार के अधीन हो गई.लेकिन 27 अगस्त को हाई कोर्ट से स्टे आदेश आने की सूचना मिली। विकास त्यागी ने सवाल उठाया कि जब 26 तारीख को प्रशासन कोर्ट आदेश का पालन कर किला अपने कब्जे में ले चुका था, तो 27 तारीख को स्टे का क्या औचित्य रह गया?
उन्होंने आरोप लगाया कि 27 अगस्त को कुछ लोग फिर से किले में घुसकर पंचायत करने लगे और प्रशासन ने उन पर कोई कार्रवाई नहीं की, जबकि यह कोर्ट की अवमानना थी.इस मामले में एफआईआर दर्ज होनी चाहिए थी.विकास त्यागी ने स्थानीय प्रशासन, विशेषकर एसडीएम नकुड़ पर मिलीभगत का आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार को बदनाम करने और कोर्ट की अवमानना कराने का काम हो रहा है.उन्होंने घोषणा की कि इस संबंध में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस को पत्र लिखकर शिकायत करेंगे.