अपने गांव को भूले मुखिया, पड़ोसी गांव को दान कर दिए बर्तन; नाराज ग्रामीणों ने लगाया जुर्माना…

कर्नाटक के चिकमंगलूर से एक अजीब मामला सामने आया है, यहां एक गांव में मुखिया का ही बहिष्कार कर दिया गया. ये मामला मुल्लुवारे गांव का है, जहां पड़ोसी गांव में आयोजित एक शादी समारोह के लिए अपने गांव से बर्तन देने पर गांव के मुखिया का ग्रामीणों ने बहिष्कार कर दिया. यही नहीं उन पर 5,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है.

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दरअसल, मुल्लुवारे गांव के भैरप्पा परिवार को गांव से बाहर कर दिया गया है. कहा गया है कि गांव में कोई भी परिवार मुखिया के परिवार से बात नहीं कर सकता और न ही कोई भी उनके घर जा सकता है. अगर गांव में से कोई भी इसके खिलाफ काम करेगा और भैरप्पा के परिवार से बात करेगा या उनके घर जाएगा तो उस पर भी 500 रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा. 5,000 जुर्माने का आदेश दिया गया है.

पड़ोसी गांव को दान किए बर्तन

ग्रामीणों के बाहर निकालने के बाद भैरप्पा न्याय की मांग करते हुए जिला कलेक्टर कार्यालय और पुलिस स्टेशन के चक्कर काट रहे हैं. भैरप्पा को ग्रामीणों ने मुल्लुवारे गांव का नेता चुना था. मुल्लुवारे गांव के पास केसरीके गांव में एक ही दिन तीन शादियां हुईं. उस दिन केसरीके गांव के लोग भैरप्पा आए थे और कहा था कि उन्हें खाना पकाने के बर्तनों की परेशानी है और उन्होंने बर्तनों की मांग की थी. भैरप्पा ने चुनाव के दौरान लाए गए बर्तनों को पड़ोसी गांव में शादी कार्यक्रम के लिए दे दिए थे, जिससे गांव वाले नाराज हो गए और इस वजह से उनका बहिष्कार कर दिया गया.

लगाया 5 हजार का जुर्माना

यह पहली बार नहीं है जब भैरप्पा ने बर्तन दान किए हैं. भैरप्पा ने पहले भी दूसरे गांव को बर्तन दान में दिए थे, जिस वजह से बहिष्कार किया गया है और गांव वालों ने 5,000 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है और किसी को भी भैरप्पा के घर न जाने की भी बात कही गई है. भैरप्पा ने कहा कि मैंने पहले भी पड़ोसी शहर में आयोजित कार्यक्रमों के लिए खाना मुहैया कराया है, लेकिन तब यह गलत नहीं लगा था. अब, मैंने जिला कलेक्टर और अल्दुर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है और न्याय की गुहार लगाई है.

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