कथावाचक की बात हुई सच, कहा था- एक दिन सबको जाना है, अगले दिन खुद ही चल बसे

मध्य प्रदेश: जिंदगी में कब क्या हो जाए, ये कोई नहीं कह सकता. मौत कभी भी कहीं भी और कैसे भी आ सकती है. ऐसा ही एक मामला मध्य प्रदेश के राजगढ़ से सामने आा है. यहां एक कथावाचक की बात सच हो गई. उन्होंने कथा में कहा था- एक दिन सबको जाना है. फिर तीसरे दिन उनकी खुद ही मौत हो गई. उनकी मौत हार्ट अटैक से हुई.

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जानकारी के मुताबिक, ब्यावरा में राधा-कृष्ण मंदिर में शिव पुराण कथा चल रही है. कथा 6 अप्रैल तक होने वाली थी. इसमें कथा वाचक थे इंदौर के पंडित राकेश व्यास, जो कि बावल्या खुर्द गांव के निवासी थे. पंडित राकेश व्यास भक्तों को शिव महिमा सुना रहे थे.

आयोजक समिति ने बताया कि मंगलवार को शिव महापुराण कथा के दौरान कथावाचक ने विभिन्न प्रसंग पर कथा सुनाई थी और अलग अलग तथ्य रखे थे. कथावाचक ने कहा था कि जिंदगी रंज-ओ-गम का मेला है. कल मैं रहूं या ना रहूं, तुम रहो या ना रहो, कथा का श्रवण कर लीजिए, एक दिन राजा हो या रंक या फकीर सबको जाना ही है.

देर रात तक कर रहे थे कथावाचक बातचीत

आयोजन समिति ने बताया कि मंगलवार को कथा खत्म होने के बाद पंडित राकेश व्यास रात डेड से दो बजे तक बातचीत करते रहे. इसके बाद सोए तो फिर सुबह नहीं उठे. सुबह जब आयोजनकर्ता चाय लेकर उन्हें उठाने पहुंचा तो वो नहीं जागे. शरीर मे भी कोई हलचल् नही थी, जिसके बाद तुरंत उन्हें ब्यावरा के निजी अस्पताल मे ले जाया गया. वहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया.

डॉक्टरों का कहना है कि नींद में ही उन्हें साइलेंट अटैक आया होगा. कथा वाचक पंडित राकेश व्यास इंदौर के पास गांव के रहने वाले थे. कथावाचक की मौत की खबर सुन सभी हतप्रद हैं. किसी को भी विश्ववास नहीं हो पा रहा है कि पंडित जी अब इस दुनिया में नहीं हैं.

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