मेडिकल कॉलेज के कैंसर यूनिट में कटौती के बाद शहरवासियों में नाराजगी बढ़ती जा रही है. अब जनता विधायक के खिलाफ मुखर हो गई. जगह-जगह विधायक के लापता होने के पोस्टर लगा दिए हैं. पोस्ट में लिखा है, सतना का शुभचिंतक कौन है? पोस्टर के बाद नेताओं में हड़कंप मचा हुआ है.
कैंसर जैसी गंभीर बीमारी के इलाज के लिए यहां यूनिट की बेहद आवश्यकता थी, लेकिन अब इसे सतना से हटा दिया गया है. जब विरोध बढ़ा तो राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी ने अधिकारियों के साथ बैठक कर फिर से स्वीकृति दिलाने का आश्वासन दिया.
जनता के संघर्ष से मिला था मेडिकल कॉलेज
सतना मेडिकल कॉलेज यहां की जनता के संघर्ष का परिणाम था. अगर इसका श्रेय किसी को जाता है तो वह सतना की जनता है, जिसने इस मेडिकल कॉलेज के लिए सड़कों पर उतरकर आंदोलन किया था. हर गली, हर चौराहे पर लोगों ने आवाज उठाई थी.
स्कूलों में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं से लेकर सामाजिक संगठनों तक ने इसके लिए संघर्ष किया. सरकार पर दबाव बनाया गया, तब जाकर सतना में मेडिकल कॉलेज स्वीकृत हुआ. लेकिन अब कैंसर यूनिट को छीन लेना सतना की जनता के साथ अन्याय है.
यह फैसला केवल प्रशासनिक चूक है या इसके पीछे कोई राजनीतिक षड्यंत्र है, यह स्पष्ट नहीं हो सका है. लेकिन यह निश्चित है कि इस फैसले से हजारों मरीजों को बहुत असुविधा होगी, जिन्हें अब इलाज के लिए अन्य शहरों का रुख करना पड़ेगा.