चुनाव आयोग ने दिल्ली में वोटर लिस्ट के स्पेशल समरी रिवीजन के संबंध में आम आदमी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी की चिंताओं और सवालों को लेकर निर्देश जारी किया है. आयोग ने दिल्ली के मुख्य चुनाव अधिकारी (सीईओ) को निर्देश दिया है कि वे इन चिंताओं को दूर करें और चुनाव से पहले वोटर लिस्ट को अंतिम रूप देने में पारदर्शिता सुनिश्चित करें.
आप ने लगाया था आरोप
आप के प्रतिनिधिमंडल ने चुनाव आयोग से मिलकर ये आपत्ति जताई थी कि वैध मतदाताओं का नाम बड़े पैमाने पर वोटर लिस्ट से हटाया जा रहा है और ऐसा बीजेपी की शह पर हो रहा है. वहीं बीजेपी की यह मांग थी कि अवैध प्रवासियों और ‘घोस्ट वोटर्स’ को सूची से हटाया जाए. इन्हीं शिकायतों के मद्देनजर आयोग ने प्रावधानों और दिशानिर्देशों का पालन करने पर जोर देने के लिए कहा है. मतदाताओं का हटना केवल चुनावी पंजीकरण अधिकारी (ईआरओ) की सत्यापन प्रक्रिया पर ही निर्भर होगा, विशेष रूप से तब जब किसी मतदान केंद्र पर हटाने की दर 2% से अधिक हो या जब एक ही व्यक्ति द्वारा पांच बार से अधिक आपत्तियां दर्ज की जाएं.
सीईओ दिल्ली की वेबसाइट पर अपलोड करना अनिवार्य
राजनीतिक दलों के साथ दावे और आपत्तियों की सूचियों का नियमित आदान-प्रदान करने का भी निर्देश दिल्ली चुनाव कार्यालय को दिया गया है. साथ ही, इन्हें सीईओ दिल्ली की वेबसाइट पर अपलोड करना भी अनिवार्य होगा. चुनाव आयोग की कोशिश है कि पार्टियों द्वारा उठाई गई आपत्तियों के लिए एक पारदर्शी समाधान प्रक्रिया सुनिश्चित की जाए. ताकि 2025 के दिल्ली विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची में बदलाव सटीक और निष्पक्ष हों.
इस प्रक्रिया के तहत, चुनाव आयोग यह सुनिश्चित करना चाहता है कि मतदाता सूची में फर्जी या अनधिकृत एंट्री की संभावना को न्यूनतम किया जाए, साथ ही योग्य मतदाताओं को हटाए जाने से भी बचाया जाए.