सागर : चैत्र नवरात्रि की शुरुआत आज 30 मार्च से हो रही है. नवरात्र पर्व को लेकर सागर जिले के प्रसिद्ध रानगिर माता मंदिर पर मेला लगेगा. यहां नवरात्र के नौ दिनों तक हजारों की संख्या में श्रद्धालु माता के दर्शन करने पहुंचते हैं पर्व पर भक्तों की भीड़ और व्यवस्थाओं को देखते हुए मां हरसिद्धी देवी मंदिर में बैठक के दौरान बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि माता के गर्भगृह का ताला 29 मार्च की रात से 12 अप्रैल की रात तक पूर्णत: बंद रहेगा.
सिर्फ सुबह और शाम की आरती के लिए पंडा, पुजारियों, ट्रस्ट के सदस्य और तहसील कार्यालय से लगाए गए पटवारियों की उपस्थिति में खोला जाएगा. शनिवार रात तहसीलदार रहली ने यह आदेश जारी कर दिया है.
रहली के रानगिर में विराजी मां हरसिद्धि तीन रूप में दर्शन देती हैं. सागर से करीब 60 किलोमीटर दूर नरसिंहपुर मार्ग पर स्थित प्रसिद्ध तीर्थ क्षेत्र रानगिर अपने आप में एक विशेषता समेटे हुए है. देहार नदी के तट पर स्थित इस प्राचीन मंदिर में विराजी मां हरसिद्धि देवी की मूर्ति दिन में तीन रुपों में दर्शन देती हैं. प्रात: काल मे कन्या, दोपहर में युवा और सायंकाल प्रौढ़ रुप में माता के दर्शन होते है. जो सूर्य, चंद्र और अग्नि इन तीन शक्तियों के प्रकाशमय, तेजोमय तथा अमृतमय करने का संकेत है.
रानगिर मंदिर के पुजारी ने बताया कि हरसिद्धि माता के बारे में कई किवदन्तियां प्रचलित हैं. एक किवदन्ती के अनुसार रानगिर में एक चरवाहा हुआ करता था. चरवाहे की एक छोटी बेटी थी। बेटी के साथ एक वन कन्या रोज आकर खेलती थी एवं अपने साथ भोजन कराती थी तथा रोज एक चांदी का सिक्का देती थी.
चरवाहे को जब इस बात की जानकारी लगी तो एक दिन छुपकर दोनों कन्या को खेलते देख लिया चरवाहे की नजर जैसे ही वन कन्या पर पड़ी तो उसी समय वन कन्या ने पाषाण रूप धारण कर लिया. बाद में चरवाहे ने कन्या का चबूतरा बना कर उस पर छाया आदि की और यहीं से मां हरसिद्धि की स्थापना हुई.