Uttar Pradesh: अयोध्या में गीता जयंती का भव्य उत्सव, 2000 विद्वानों ने किया गीता पाठ

Uttar Pradesh: अयोध्या में बुधवार को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास के आश्रम, मणिराम दास छावनी में गीता जयंती का पर्व बड़े धूमधाम से मनाया गया, इस आयोजन में 2000 से अधिक वैदिक विद्वानों, ब्राह्मणों, संतों और धर्माचार्यों ने सस्वर गीता पाठ किया, इस अवसर पर श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर भव्य मंदिर निर्माण की कामना भी किया गया.

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प्रमुख बातें:

कार्यक्रम में अयोध्या, मथुरा, काशी और प्रयागराज सहित अन्य जिलों के वैदिक विद्यार्थी और संस्कृत मनीषी शामिल हुए.

मणिराम दास छावनी संस्कृत पाठशाला के प्राचार्य आनंद शास्त्री ने गीता जयंती का महत्व बताते हुए कहा कि यह दिन भगवान श्रीकृष्ण द्वारा अर्जुन को कर्म प्रधानता का उपदेश देने का प्रतीक है.

इस अवसर पर विश्व हिंदू परिषद के प्रांतीय मीडिया प्रभारी शरद शर्मा ने गीता जयंती को कर्म की प्रेरणा देने वाला पर्व बताया और श्रीकृष्ण जन्मभूमि के शीघ्र भव्य होने की कामना की.

इतिहास से जुड़ा महत्व:
गीता जयंती के दिन 6 दिसंबर 1992 को विवादित ढांचे का विध्वंस हुआ था. इस आयोजन के माध्यम से साधु-संत भगवान श्रीराम के मंदिर के निर्माण की सफलता के साथ मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मभूमि के भव्यता का भी संकल्प दोहराते हैं.

संविधान का पालन करते हुए कार्य:
शरद शर्मा ने यह भी स्पष्ट किया कि हर कार्य संविधान के दायरे में रहते हुए किया जा रहा है. उन्होंने समाज को गीता के उपदेशों से प्रेरणा लेते हुए कर्मशील बनने का संदेश दिया.

आयोजन का उद्देश्य:
गीता पाठ के माध्यम से न केवल धर्म और संस्कृति का प्रचार-प्रसार किया गया, बल्कि सामाजिक आचरण को सुधारने और कर्म को प्राथमिकता देने का संदेश भी दिया गया.
उन्होंने कहा कि आज हमारा यही संदेश है कि समाज कर्म की शिक्षा ले. उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का जन्म स्थान मथुरा है और अब स्वाभाविक है कि मथुरा की भी मुक्ति होनी चाहिए. हम सभी संविधान को मानते हैं और संविधान दायरे में होकर कार्य संपन्न हो रहा है तो उसका सभी को पालन करना चाहिए.

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