अखरोट या बादाम: दिमाग तेज करने में कौन ज्यादा फायदेमंद? जानिए एक्सपर्ट की राय!

जब दिमागी सेहत और तेज याददाश्त की बात आती है, तो अखरोट और बादाम को खाने का ख्याल दिमाग में आता है. ये न सिर्फ मानसिक विकास को बढ़ावा देते हैं बल्कि ब्रेन फंक्शन को भी सुधारते हैं. बादाम में विटामिन E, एंटीऑक्सीडेंट और हेल्दी फैट्स होते हैं, जो दिमाग को एक्टिव रखते हैं और मेमोरी पावर को बूस्ट करते हैं. वहीं, अखरोट को “ब्रेन फूड” कहा जाता है, क्योंकि इसमें ओमेगा-3 फैटी एसिड भरपूर मात्रा में पाया जाता है, जो न्यूरॉन्स को मजबूत करने और सोचने-समझने की क्षमता बढ़ाने में मदद करता है.

Advertisement

ऐसे में अक्सर लोगों के मन में ये सवाल आता है कि आखिर अखरोट और बादाम में से दिमाग को तेज बनाने के लिए क्या ज्यादा फायदेमंद है. अगर आप भी इसका जवाब जानना चाहते हैं तो ये आर्टिकल आपके लिए है. इस आर्टिकल में हम आयुर्वेदिक एक्सपर्ट डॉ किरण गुप्ता से जानेंगे कि दोनों ड्राई फ्रूट्स में से दिमाग को तेज करने के लिए कौन ज्यादा फायदेमंद है.

क्या है ज्यादा फायदेमंद?

डॉ किरण गुप्ता कहती हैं कि अगर तुलना करें कि कौन ज्यादा फायदेमंद है, तो अखरोट को दिमाग के लिए थोड़ा ज्यादा असरदार माना जाता है क्योंकि इसमें भरपूर मात्रा में ओमेगा-3 फैटी एसिड होता है, जो दिमाग की सेहत के लिए बेहद जरूरी है. यह याददाश्त बढ़ाने, फोकस सुधारने और न्यूरॉन्स को मजबूत करने में मदद करता है. रिसर्च में भी यह पाया गया है कि जो लोग नियमित रूप से अखरोट खाते हैं, उनमें डिमेंशिया और अल्जाइमर जैसी बीमारियों का खतरा कम होता है. मगर अखरोट को हमेशा भिगोकर ही खाना चाहिए और एक संतुलित मात्रा में खाना चाहिए.

क्या बादाम फायदेमंद नहीं है?

ऐसे में ये सवाल उठना लाजमी है कि क्या दिमाग के लिए बादाम फायदेमंद नहीं होता है? इसपर डॉ किरण गुप्ता ने बताया कि बादाम भी दिमाग के लिए फायदेमंद होता है. बादाम में विटामिन E, एंटीऑक्सीडेंट और हेल्दी फैट्स होते हैं, जो दिमाग को एक्टिव रखते हैं और मानसिक थकान कम करते हैं. खासतौर पर भिगोए हुए बादाम याददाश्त बढ़ाने में मददगार होते हैं.

मगर जब सीधी तुलना की जाए तो ओमेगा-3 की ज्यादा मात्रा के कारण अखरोट दिमाग के लिए थोड़ा ज्यादा असरदार होता है. अगर सही तरीका अपनाना हो, तो दोनों को डाइट में शामिल करें. सुबह 4-5 भिगोए हुए बादाम खाएं और दिन में 2-3 अखरोट लें. इससे दिमाग तेज रहेगा, फोकस बेहतर होगा और मानसिक थकान भी दूर होगी. लेकिन अगर आपको किसी तरह की गंभीर बीमारी है या आपको कोई इलाज चल रहा है तो आप डॉक्टर की सलाह लेने के बाद ही अपनी डाइट में कुछ बदलाव करें.

Advertisements