तेलंगाना पुलिस ने छत्तीसगढ़ सीमा पर फिल्म पुष्पा स्टाइल में हो रही सागौन की तस्करी का पर्दाफाश किया है. तस्करों ने ट्रक की जगह एक खास तरह से मॉडिफाई की गई सात-सीटर की कार का इस्तेमाल किया. यह कार विशेष रूप से लकड़ी की तस्करी के लिए मॉडिफाई की गई थी. वेंकटपुरम वन अधिकारियों की चौकसी के आगे उनकी चालाकी धरी रह गई. वन अधिकारियों ने उनके पास से भारी मात्रा में बेशकीमती सागौन की लकड़ियां जब्त की हैं. आधी रात को हुई इस कार्रवाई में तस्करों को रंगे हाथों पकड़ लिया गया है और आगे की जांच जारी है.
जानकारी के मुताबिक, वन विभाग की शुरुआती पूछताछ में सामने आया है कि यह कोई अकेली घटना नहीं है. कुछ तस्कर इस लकड़ी को छत्तीसगढ़ से भद्राद्री कोठागुडेम जिले के रास्ते मोडिफाइड कार में भरकर शहरों में ले जा रहे हैं. बुधवार की आधी रात को चर्ला और वेंकटपुरम के रास्ते वारंगल जा रही गाड़ी को वेंकटपुरम के अलुबाका में वन अधिकारियों ने रोक लिया. गाड़ी में बड़ी मात्रा में सागौन की लकड़ी बरामद हुई.
तस्करों का बड़ा नेटवर्क, जांच में कई लोग
सूत्रों के अनुसार, इनके पीछे एक संगठित गिरोह काम कर रहा है. तस्करों का नेटवर्क छत्तीसगढ़ से लेकर तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के कई शहरों तक फैला हुआ है. जांच में यह भी सामने आया है कि स्थानीय स्तर पर कुछ लोग इन तस्करों की मदद कर रहे थे. वन विभाग पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि किन स्थानीय व्यापारियों या लकड़ी माफियाओं के साथ इन तस्करों के संबंध थे. वन विभाग के अधिकारियों की टीमें उन प्रमुख गिरोह को पकड़ने में जुट गई हैं.
गाड़ी में छुपाने का अनोखा तरीका
जब्त की गई कार की जांच में पाया गया कि इसे पूरी तरह से तस्करी के लिए डिजाइन किया गया था. गाड़ी की सीटों के नीचे और डैशबोर्ड के पीछे विशेष चैंबर बनाए गए थे. जिनमें लकड़ी छुपाई जा सकती थी. अधिकारियों का मानना है कि इस तरीके से पहले भी कई खेप शहरी इलाकों में भेजी गई होंगी. इस घटना के बाद वन विभाग ने अब अपनी रणनीति बदलने का फैसला किया है. वन विभाग के अधिकारियों ने सीमावर्ती इलाकों में गश्त बढ़ाने और ऐसे मॉडिफाइड वाहनों पर विशेष नजर रखने का निर्णय लिया है.