मेरा बेटा शाहरुख हुसैन अच्छा भला था। उसे कोई तकलीफ नहीं थी। प्रतिदिन वह सुबह जल्दी उठकर मंडी में हम्माली करने जाता था। 31 जुलाई की सुबह वह मंडी जाने के लिए घर से पैदल निकला। सुबह करीब 5.30 बजे सायर चबूतरा पर कुत्ते ने उस पर हमला कर दिया। दाहिना पैर के घुटने के नीचे इतना जोरदार काटा की उसका मांस निकल गया।
शुरुआत में सही इलाज मिल जाता तो आज हमें यह दिन देखने को नहीं मिलता। हमारा बच्चा हमारे हाथों से नहीं जाता। उसके तीन बच्चे अनाथ नहीं होते। किराए के मकान में रहकर हम्माली करता था। अब उसके तीन बच्चे को कौन पालेगा।
आंखों में आंसू के साथ यह दर्द उस पिता का था जिसने अपने जवान बेटे को कुत्ते के काटने से खोया है। पिता नासिर हुसैन ने जिला अस्पताल से लेकर रतलाम के शासकीय डॉ. लक्ष्मीनारायण पांडेय मेडिकल कॉलेज में समय पर इलाज नहीं करने व कुत्ते के काटने के बाद घाव पर लगाने वाला इंजेक्शन नहीं लगाने का आरोप लगाया है। जिससे उसे रैबीज के सिंप्टम्स आ गए। मौत के तीन दिन पहले वह हवा से डरने लगा था। पानी पीने में भी डर रहा था, खाना-पीना छोड़ दिया था। मुहं से लार टपक रही थी।
रतलाम शहर के अशोक नगर में रहने वाला शाहरुख (30) पिता नासिर हुसैन सैलाना बस स्टैंड सब्जी मंडी में सुबह हम्माली करता था और दिन में वह ऑटो रिक्शा चलाता था। 31 जुलाई की सुबह मंडी पैदल जाते समय उसे सायर चबूतरा पर कुत्ते ने काट लिया। पिता नासिर हुसैन व इनके दोस्त इरफान जिला अस्पताल लेकर पहुंचे।
जहां प्राथमिक उपचार कर कहा कि हमारे पास घाव पर लगाने वाला इंजेक्शन नहीं है। वह 16 हजार रुपए का आता है। 72 घंटे में इंदौर ले जाने को कहा। फिर वहां से मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया। सुबह वहां पर इंजेक्शन बॉटल में लगाया। 4 से 5 घंटे भर्ती रखा, फिर शाम 5 बजे छुट्टी कर दी। अगले दिन से बेटा अपने काम पर जाने लगा।
23 अगस्त को बिगड़ी तबीयत
23 अगस्त को शाहरुख के पैर में दर्द होने लगा। मंडी से वह घर लौटा। परिजनों को बताया, तब पिता नासिर हुसैन व भाई मोहम्मद शाहिद उसे लेकर जिला अस्पताल पहुंचे। ड्यूटी डॉक्टर ने प्राथमिक उपचार कर उसे एडमिट कर दिया। इससे उसे थोड़ा बहुत आराम मिला। लेकिन, बाद में फिर इसकी तबीयत बिगड़ी। हॉस्पिटल के डॉक्टर अंकित जैन को अलग से प्राइवेट बताया।
उन्होंने इसे जिला अस्पताल में ही भर्ती रखा। मंगलवार शाम (26 अगस्त) को फिर तबीयत बिगड़ी। शरीर सुन होने लगा। तब डॉक्टर को फिर से बताया तो कहा कि नस की तकलीफ है। कुत्ते के काटने की तकलीफ नहीं बताई। अगले दिन कहा कि कुत्ते के काटने से नस दब गई है। फिर से बेटे को बॉटल व इंजेक्शन लगाए गए। आईसीयू में एडमिट कर दिया।
पिता ने बताया कि 26 अगस्त को रैबीज के लक्षण दिखने पर जिला अस्पताल से बेटे को फिर से मेडिकल कॉलेज रेफर किया। हम उसे वहां नहीं ले जाते हुए रात 3 बजे प्राइवेट गाड़ी कर गुजरात के दाहोद के जाइडस हॉस्पिटल लेकर गए। वहां से हमें इंदौर या अहमदाबाद जाने को कहा।
हम दोपहर 12 बजे अहमदाबाद के सिविल हॉस्पिटल लेकर गए। वहां से कहां की आखरी स्टेज है, अब कोई इलाज नहीं हो सकता। इसके बाद उसे दोपहर 3 बजे अहमदाबाद में ही प्राइवेट हॉस्पिटल लेकर गए। जहां पांव का घाव व शरीर की हरकत को देख डॉक्टरों ने कहा कि रैबीज का जहर शरीर में चढ़ गया है। अब इसका कोई इलाज नहीं है, घर जाने को कह दिया। शाम 5 बजे अहमदाबाद से वापस निकले। रात में मेघनगर पहुंचते ही बेटे ने दम तोड़ दिया।
भाई ने कहा इंजेक्शन घाव पर नहीं लगाया
शाहरुख के भाई मोहम्मद शाहिद ने बताया कि जब 31 जुलाई को भाई को अस्पताल ले जाया गया था, तब गुजरात के डॉक्टरों ने यह जानना चाहा कि उसे इंजेक्शन सही तरीके से लगाया गया था या नहीं। तब शाहरुख ने खुद बताया था कि इंजेक्शन शरीर पर नहीं, बल्कि बॉटल में लगाया गया था और उसी दिन शाम को छुट्टी भी दे दी गई थी।
गुजरात के डॉक्टरों ने स्पष्ट कहा कि मेडिकल कॉलेज की लापरवाही रही, क्योंकि जब कुत्ते का काटा हुआ घाव बड़ा होता है, तो खास इंजेक्शन (इम्यूनोग्लोबुलिन) घाव के पास लगाया जाना जरूरी होता है। यह इंजेक्शन प्राइवेट में 16 से 17 हजार रुपये का आता है। शाहरुख को यह इंजेक्शन नहीं लगाया गया, जिससे इंफेक्शन पूरे शरीर में फैल गया। ओर।उसकी मौत हो गई